पैंसठ साल पहले धर्म के नाम पर हिंदुस्तान का बंटवारा हुआ था. लेकिन तब भी लोगों को ये आजादी जरूर थी कि वो जहां बसना चाहें, वहां रहें, अपनी धार्मिक पहचान के साथ. लेकिन पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यकों के लिए दिन पर दिन स्थिति बदतर होती चली गयी और 65 साल में हालात इस मोड़ पर आ गये कि जब हम आजादी का जश्न मना रहे हैं, उसी वक्त पाकिस्तान से सैकड़ों परिवार हिंदुस्तान में आ चुके हैं अपने जख्मों को समेटे हुए.
Friday, August 17, 2012
पाकिस्तान से तंग होकर आ रहे हिंदुओं को भारत सरकार हर मुमकिन मदद देने को तैयार है। केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने गुरुवार कहा कि सही तरीके से आवेदन करने पर इन शरणार्थियों को लंबी अवधि का वीजा देने पर विचार किया जाएगा। गृह सचिव ने बताया कि फिलहाल अब तक एक भी पाकिस्तानी हिंदू ने दीर्घकालीन वीजा के लिए आवेदन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन वीजा के लिए निर्धारित नियम हैं। यदि इसके अंतर्गत आवेदन किया जाता है तो उन्हें ये दिए जाएंगे। सिंह से पूछा गया था कि क्या बीते कुछ दिनों में भारत आए पाकिस्तानी हिंदुओं को दीर्घकालीन वीजा दिया जाएगा? पिछले दिनों भारत आए सैकड़ों हिंदुओं में से ज्यादातर एक माह की अवधि तक के लिए वैध वीजा पर आए हैं। ये तीर्थयात्रा के लिए जारी किए जाते हैं, लेकिन अधिकांश पाकिस्तानी हिंदुओं की वापस अपने वतन लौटने की इच्छा नहीं है। ये और बात है कि पाकिस्तान से निकलते वक्त उन्होंने प्राधिकरणों को लिखित में दिया है कि वे भारत में शरण नहीं लेंगे और 30 दिनों के भीतर वापस अपने देश लौटेंगे। सैकड़ों हिंदुओं के साथ पड़ोस से भारत पहुंचे अनूप कुमार ने बताया कि पाकिस्तान में हिंदू परिवार सुरक्षित नहीं हैं। हिंदुओं की जवान लड़कियों और महिलाओं का कट्टरपंथी गोली की नोंक पर अपहरण कर लेते हैं। यह रोज-रोज की बात हो गई है। गृह सचिव का यह बयान बुधवार को विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने भारत आने वाले हिंदुओं के प्रति उदारता बरतने के संकेत दिए थे। दो सप्ताह बाद इस्लामाबाद जा रहे कृष्णा ने दोनों देशों के बीच विदेश मंत्री स्तरीय बातचीत में इस मुद्दे को उठाने की बात कही थी। कृष्णा 7-9 सितंबर के बीच पाकिस्तान जाने वाले हैं।
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